लफ़्ज़ों में जाहिर करूँ तो , मेरी ख्वाहिश की तौहीन होगी... !
तू मेरी रूह में उतर के समझ ले मेरी हसरतों को....!
तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन नहीं ,
मेरा भी वजूद है, मैं कोई आइना नहीं....!
तुम शिकायतों का "रिवाज" ख़त्म कर दो...
में शिकायतों की "वजह" ख़त्म कर देता हूँ !
चलो खामोशियों की गिरफ्त में चलते है
बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे...
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