Tuesday, 21 February 2017

Two Line Shayari

लफ़्ज़ों  में जाहिर करूँ तो , मेरी ख्वाहिश  की तौहीन होगी... !
तू मेरी रूह में उतर  के समझ ले मेरी हसरतों  को....!


तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन नहीं ,
मेरा भी वजूद है, मैं कोई आइना नहीं....!




तुम शिकायतों का "रिवाज" ख़त्म कर दो... 
में शिकायतों की "वजह" ख़त्म कर देता हूँ ! 


चलो खामोशियों की गिरफ्त में चलते है 
बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे...

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